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क्या निर्धारित सीमा के बाद हटेंगे अतिथि अध्यापक ?

Posted On: 2 Apr, 2012 Others में

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अतिथि अध्यापकों को सुप्रीम कोर्ट द्वारा नई भर्ती तक बने रहने की राहत मिल गई है । यह राहत अनिवार्य लग रही थी क्योंकि सरकार ने नई भर्ती के लिए कुछ समय माँगा था । उच्च न्यायालय ने सरकार को 322 दिन का समय दिया था । साथ ही अतिथि अध्यापकों को हटाने का निर्देश था । ऐसे में स्कूल कैसे चलेंगे यह दुविधा उत्पन्न हो गई थी । माननीय न्यायालय ने अतिथियों को बनाए रखने के निर्देश के साथ इस दुविधा का अंत कर दिया लेकिन सरकार को अब चाहिए कि वे इसके निहितार्थ को समझते हुए इसे अंतिम सीमा माने । इन दिनों का लाभ अतिथियों को स्थायी करने के लिए किसी चोर रास्ते की तलाश करने के लिए नहीं होना चाहिए । सरकार यह तो सदा से कहती आई है कि स्थायी भर्ती होते ही अतिथों को हटा दिया जाएगा लेकिन इससे पहले ऐसा नहीं हुआ । यथा 2011 में 9000 के लगभग प्राथमिक शिक्षक नियुक्त किए गए उस समय अतिथियों को हटाना तो दूर यहाँ अतिथि अध्यापक नियुक्त थे उस स्टेशन को रिक्त मानने से भी इनकार कर दिया गया परिणाम स्वरूप अपने जिले में स्थान रिक्त होने के बावजूद नवनियुक्त अध्यापकों को सैंकड़ों किलोमीटर दूर नौकरी करने के लिए विवश होना पड़ा । अब भी नई भर्ती में ऐसा नहीं होगा , यह कहा नहीं जा सकता । माननीय अदालत को इस पर स्वयं संज्ञान लेना होगा कि सरकार अदालत द्वारा जारी किए आदेशों की उल्लंघना करते हुए किसी नई नीति के तहत अतिथि अध्यापकों को स्थायी न कर पाए । पात्र अध्यापकों को भी इस हेतु सजग रहना होगा ।
यहाँ तक यह कहा जा रहा है कि अतिथि अध्यापकों ने परिणाम को ऊँचा उठाया है , वो बात सत्य नहीं । यह सच है कि पिछले वर्षों में परिणाम स्तर बढ़ा है , लेकिन इसके पीछे अन्य कारण हैं । इसी दौरान स्कूलों में समेस्टर प्रणाली लागू हुई । शुरुआत में प्रथम समेस्टर में सिर्फ बहु विकल्पी प्रश्न होते थे , ऐसे में परिणाम का बढना स्वभाविक था। इसके बाद दो वर्ष तक आंतरिक मूल्यांकन के अंक पहले जोड़ने के बाद अंतिम परिणाम तैयार किया गया । उस प्रक्रिया में कुछ विषयों में तो जीरो अंक लेने वाले भी उतीर्ण हुए क्योंकि आंतरिक मूल्यांकन में 35 नम्बर लगा दिए जाते थे । अन्य विषयों में भी 18 नम्बर लगने के कारण उतीर्ण होने के लिए 80 में से सिर्फ 15 अंकों की जरूरत होती थी । पिछले वर्ष से इस पर रोक लगी और प्रणाम गिरा । आर टी आई की जानकारी के तहत हरियाणा बोर्ड ने परिणाम को वास्तविक परिणाम से बढ़कर घोषित किया । यह बात बताती है कि अतिथियों के आने से कोई परिवर्तन नहीं हुआ ।
अध्यापक संघ इनका साथ दे रहे हैं । लेकिन उन्हें यह सोचना चाहिए कि माननीय अदालत इस भर्ती को फर्जी घोषित कर चुकी है । यह सरकार की गलती है यह कहकर किसी बात से पल्ला नहीं छुड़ाया जा सकता । क्या कोई बीमारी लगने के बाद हम यह कहते हैं कि अब तो बीमारी लग गई इसे लगी रहने दो । बीमारी का जब भी पता चले उसे हटाने की कोशिश होती है फिर इस बीमारी का साथ क्यों दिया जा रहा है । यदि यह भर्ती स्थायी हो गई तो आगे के लिए भी एक परम्परा बन जाएगी ।
यह एक दुहाई भी दी जाती है कि ये छः वर्ष से कार्य कर रहे हैं तो इसी सन्दर्भ में यह भी कहा जा सकता है कि इनके कारण योग्य उम्मीदवार छः वर्ष से बेरोजगार घूम रहे हैं । जब जागो तभी सवेरा । अब भी वक्त है कि न्यायिक तरीके से भर्ती हो जो अध्यापक लगने योग्य हो उसे लगाया जाए और जो योग्य नहीं उसे घर का रास्ता दिखा दिया जाए । इस से उन लोगों को भी सबक मिलेगा जो कहते हैं कि येन- केन-प्रकरेण नौकरी हथिया लो बाद में आपको कोई निकाल तो सकता नहीं ।
यह कठोर निर्णय लेने का वक्त है देखते हैं हरियाणा सरकार आने वाले दिनों में क्या फैसला लेती है । 322 दिन तो अंतिम सीमा है । पहली लिस्ट तो जल्दी ही आ सकती है और इस लिस्ट के आते ही पता चल जाएगा कि सरकार की नियत क्या है ।
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